+91-9977847327,9406626131

 

कुंडेश्वर महादेव का इतिहास

चंदनवन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव का मंदिर विद्यमान है यह मंदिर उज्जैन के 84 महादेव में से 40 नंबर पर आता है ! उज्जैन में 84 महादेव प्रसिद्ध है !

जहां पर भगवान शंकर किसी न किसी कारणवश उस शिवलिंग में प्रकट हुए और तपस्वियों को वरदान देते थे ! आज भी 84 महादेव अवंतिका पुरी में विराजमान है !
श्रावण मास और हर 3 वर्ष में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास में इन 84 महादेव की यात्रा होती है जिसके फलस्वरूप 8400000 योनियों से मुक्ति मिलती है सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित 84 महादेव में 40 नंबर पर आने वाली श्री कुंडेश्वर महादेव विराजमान है इनकी भी एक कथा प्रसिद्ध है जो निम्न है !एक बार की बात है भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती बड़े वेग से नंदी पर बैठकर भ्रमण के लिए निकले , महाकाल वन पहुंचकर माता पार्वती को बड़ी थकान महसूस होने लगी, थकी हुई पार्वती को देखकर भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती से कहा पार्वती तुम यहीं पर विराजमान हो ताकि तुम्हारी थकान दूर हो जाएगी ! मैं थोड़ा आगे तक घूम कर आता हूं , और तुम्हारी सुरक्षा के लिए मेरा यह गण जिसका नाम कुंड है और नंदी तुम्हारे साथ रहेंगे ऐसा कहकर भगवान भोलेनाथ आगे की ओर प्रस्थान कर गए, प्रतीक्षा करते हुए माता पार्वती को कइ प्रहर बीत गए भोलेनाथ नहीं आए तो उन्हें काफी चिंता सताने लगी माता पार्वती निकुंज नामक गणों को आज्ञा दी कि तुम जाओ और भगवान शंकर का पता करके आओ कुंड ने माता से कहां माता भगवान महादेव ने मुझे आप की सुरक्षा के लिए यहां नियुक्त किया है !
माता के आदेश की अवहेलना को देख माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गई और क्रोध वश उन्होंने कुंड को मनुष्य योनि में जाने का शाप दे डाला बहुत अनुनय विनय करने पर माताजी ने कहा हे कुंड मेरा श्राप कभी खाली नहीं जात ,लेकिन तुम यही महाकाल वन स्थित चंदन वन में भगवान शिव की उपासना करो तो तुम्हारा उद्धार हो जाएगा

भगवान शंकर जब वापस लौटे तो श्राप के बारे में उन्हें ज्ञात हुआ तो बड़ा दुख हुआ , लेकिन थोड़े वर्षों के बाद भगवान भोलेनाथ शिवलिंग में से प्रकट हुए जिसके सामने कुंड नामक गण तपस्या कर रहा था और कुंड को वापस शगुन के रूप में शामिल करने का वरदान दिया ! तो एक प्राचीन पद्धति कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण से मिलने भगवान महादेव पधारे थे ! यह तिथि कार्तिक मास की वैकुंठ चतुर्दशी पर आती है , उस दिन हरि कृष्ण और हर महादेव का मिलन हुआ था ,अवंतिका नगरी भगवान शिव की नगरी कहलाती है ! भगवान शिव इस नगरी के अधिपति मालिक हैं और भगवान श्री कृष्ण यहां मेहमान स्वरूप इस नगरी में आए हुए थे, अपने अभ्यागत अतिथि का हाल चाल पूछने के लिए भगवान भोलेनाथ 33 करोड़ देवी देवताओं के साथ कार्तिक मास की बैकुंठ चतुर्दशी पर पधारे थे ! दोनों ने एक दूसरे का परस्पर अभिवादन किया तत्पश्चात भगवान कृष्ण और कुंडेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन किया गया ! सभी देवगण और समस्त युवाओं की उपस्थिति में यह पूजन संपन्न हुआ इस दिन भगवान शिव को तुलसी अर्पित की गई और भगवान श्री कृष्ण को विलपत्र अर्पण किया गया! तभी से कुंडेश्वर महादेव का स्थान हरिहर मिलन स्थल के नाम से प्रसिद्ध हुआ , आज भी वर्तमान में यहां एक शिवलिंग स्थापित है यहां पर अति प्राचीन प्रतिमा खड़े हुए नंदी की हैं यहां खड़ा हुआ नंदी आदर्श सेवा और सत्कार का प्रतीक है

 

 

 
 

 

संपर्क करे